Press "Enter" to skip to content

कोरोना: प्लाज्मा थेरेपी की सफलता के प्रमाण नहीं

Share news

कोलकाता, 02 मई कोरोना वायरस ‘कोविड-19’ से संक्रमित मरीजों के इलाज में लायी गयी प्लाज्मा थेरेपी की केवल प्रयोग के तौर पर अपनायी जा रही है और इसके लंबे समय तक प्रयोग होने को लेकर कोई प्रमाण नहीं है।

 प्लाज्मा थेरेपी की कोरोना वायरस से


कोलकाता विश्वविद्यालय के महामारी रोग विशेषज्ञ और विजिटिंग प्रोफेसर नरेश पुरोहित ने कहा,“ सैद्धांतिक रूप से कोरोना वायरस से ठीक हुए व्यक्ति के एंटीबॉडी किसी कोरोना पीड़ित अन्य मरीज के रोग प्रतिरोधक क्षमता में सुधार लाते हुए बीमारी से लड़ने में मदद कर सकते हैं। इसको लेकर किये जा रहे बड़े-बड़े वादों के बीच इस इलाज को सुरक्षा के मानकों पर बिना खरा उतरे इसे व्यापक रूप से अमल में नहीं लाया जा सकता।”


कोरोना के इलाज के दौरान हर एक प्रशासनिक, सामाजिक, आर्थिक या चिकित्सा प्रतिक्रिया की गहन निगरानी की जा रही है। देश के चिह्नित अस्पतालों में कोविड रोगियों के लिए इस्तेमाल की जा रही इस प्रक्रिया में कोरोना वायरस से ठीक हो चुके लोगों के खून (एंटीबॉडी) से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जा रहा है।


राष्ट्रीय एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम के सलाहकार ने कहा, “ विज्ञान भय या लोक लुभावनवाद के बजाय तथ्य और तर्क से चलता है। बिना किसी ठोस प्रमाण के और पर्याप्त सावधानी बरते इस प्लाज्मा थेरेपी की को आगे लाने से कोविड-19 के खिलाफ हमारी लड़ाई को धक्का लग सकता है।”
डॉ पुरोहित ने बताया कि प्लाज्मा तकनीक पर हुए शोध में बहुत कम मरीजों को शामिल किया गया जिससे शोधकर्ता किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने में नाकामयाब रहे हैं।

आगे पढ़े


केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार कोरोना मरीजों के इलाज के लिये हाल ही में अपनाये गयी प्लाज्मा थेरेपी अभी भी प्रायोगिक चरण में है और जब तक इसकी पूर्णत: अनुमति नहीं मिल जाती तब तक इसे कोरोना वायरस रोगियों के उपचार के लिए इसके अमल में नहीं लाना चाहिए।

%d bloggers like this: